SINGRAULI NEWS: मुआवजा नहीं, फिर भी उजड़ रहे आशियाने NCL की कार्यशैली पर भड़के विस्थापित, बोले “हक दिए बिना घर खाली कराने का बनाया जा रहा दबाव”
सिंगरौली। कोयला उत्पादन और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक बार फिर विस्थापन का मुद्दा गरमा गया है। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो पूर्ण मुआवजा मिला और न ही रोजगार, लेकिन अब उनके घरों को खाली कराने और तोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। इसको लेकर विस्थापित परिवारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
क्या है पूरा मामला।
विस्थापितों का कहना है कि एनसीएल द्वारा अधिग्रहित भूमि और मकानों के बदले उन्हें आज तक पूर्ण मुआवजा नहीं दिया गया। कई परिवार ऐसे हैं जो वर्षों से मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
पीड़ितों का आरोप है कि जब भी वे अपने अधिकारों की बात करते हैं तो उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता है। दूसरी ओर अब प्रशासनिक दबाव के माध्यम से घर खाली कराने की कार्रवाई तेज की जा रही है।
“पहले हक दो, फिर घर मांगो”।
विस्थापित परिवारों का कहना है कि जब तक उनका पूरा मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक उनसे घर खाली कराने की बात करना अन्याय है।
ग्रामीणों ने कहा कि जिन लोगों की जमीन और मकान परियोजना के लिए लिए गए, उन्हें आज भी अपने अधिकारों के लिए भटकना पड़ रहा है। कई परिवार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं तो कई अस्थायी आशियानों में जीवन गुजार रहे हैं।
पीड़ितों ने सुनाई अपनी व्यथा
प्रभावित परिवारों ने बताया कि उनके पूर्वजों की जमीनें परियोजना के नाम पर चली गईं, लेकिन बदले में मिला केवल इंतजार। वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
उनका कहना है कि नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए, आंदोलन किए गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
विस्थापितों में बढ़ता जा रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्र में लगातार बढ़ते असंतोष को देखते हुए स्थिति कभी भी उग्र रूप ले सकती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास की कीमत केवल विस्थापित परिवारों से ही क्यों वसूली जा रही है। जिन लोगों ने अपनी जमीन और घर परियोजना के लिए दिए, उन्हें आज भी सामान जनक पुनर्वास और रोजगार का इंतजार है
बगैर पूर्ण मुआवजा दिए घर खाली करने की कार्रवाई क्यों वर्षों से लंबित रोजगार प्रकरण का निर्धारण कब होगा पुनर्वास नीति के लाभ सभी पात्र परिवारों को क्यों नहीं मिला
विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के जिम्मेदार आखिरकार मौन क्यों है
विस्थापितों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे उनका कहना है कि हमें विकास से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हमारे अधिकारों का हरण स्वीकार नहीं होगा जब मुआवजा अधूरा रोजगार अधूरा और पुनर्वास अधूरा है तो आखिर किस आधार पर विस्थापितों से उनके घर और जमीन छोड़ने की अपेक्षा की जा रही है विस्थापित परिवार की यह पीड़ा अब केवल कुछ लोगों की समस्या नहीं रह गई है बल्कि पूरे मोरवा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है आने वाले दिनों में प्रशासन और एचसीएल इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई है
