NCL जयंत परियोजना में धधक रहा करोड़ों का कोयला।
राष्ट्र की संपत्ति बन रही हैं राख जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों मौन ?
जयंत परियोजना में कोयला आग की भेंट, करोड़ों की राष्ट्रीय संपत्ति हो रहे राख उठ रहे गंभीर सवाल
सिंगरौली। एनसीएल (NCL) की जयंत परियोजना में बड़े पैमाने पर कोयला जलने की घटनाएं लगातार सामने आने से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खदान में करोड़ों रुपये मूल्य का कोयला धीरे-धीरे आग की चपेट में आकर राख बनता जा रहा है, जबकि उसके रखरखाव, सुरक्षा और संरक्षण पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से राष्ट्रीय संपत्ति को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
करोड़ों का बजट, फिर भी कोयला नहीं बच पा रहा
सूत्रों के अनुसार एनसीएल द्वारा कोयले के सुरक्षित भंडारण, रखरखाव, अग्नि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भारी राशि खर्च की जाती है। आधुनिक संसाधन, मशीनें और सुरक्षा प्रबंधन होने के बावजूद यदि कोयला लगातार जल रहा है तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
धीरे-धीरे राख बन रहा बहुमूल्य कोयला
खदान क्षेत्र के कई स्थानों पर कोयले के ढेर से धुआं निकलता देखा जा रहा है। यदि समय रहते आग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो बड़ी मात्रा में कोयला पूरी तरह जलकर नष्ट हो सकता है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी छोटे स्तर पर लापरवाही होती है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है, लेकिन करोड़ों रुपये मूल्य की राष्ट्रीय संपत्ति जलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सक्रिय दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र की संपत्ति की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?
कोयला देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा संपदा है। बिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में यदि खदान में कोयला जलकर नष्ट हो रहा है तो यह केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के संरक्षण का भी गंभीर विषय है।
स्थानीय लोगों की मांग
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
कोयले को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से अपेक्षा
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये मूल्य का कोयला पूरी तरह नष्ट हो सकता है। इसलिए संबंधित विभागों को तत्काल निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और राष्ट्रीय संपत्ति के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
