NCL की तीसरी आंख भी फेल बूम बैरियर बना दिखावा।
खदान में बेधड़क घुस रहे अनाधिकृत वाहन, करोड़ों के कोयला-कबाड़ पर डाका?
डंपर क्षेत्र के सिंह और खान के जोड़ी धडल्ले से कर रही है कबाड़ की चोरी
जयंत और निगाही परियोजना में चोरी का खेल चरम पर, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सिंगरौली। एनसीएल की जयंत और निगाही परियोजनाएं एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में हैं। खदान क्षेत्र में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, बूम बैरियर, जियो-टैग निगरानी और निजी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती के बावजूद कोयला और कबाड़ की चोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
तीसरी आंख होने के बावजूद कैसे हो रही चोरी?
एनसीएल ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक कैमरे, बूम बैरियर और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की है। इसके बावजूद यदि अनाधिकृत पिकअप और हाईवा वाहन खदान क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगरानी तंत्र आखिर काम कैसे कर रहा है।
बूम बैरियर केवल दिखावा?
चर्चा है कि जिन बूम बैरियरों का उद्देश्य हर वाहन की निगरानी करना है, वहीं से कथित रूप से संदिग्ध वाहन बिना रोक-टोक गुजर जाते हैं। जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
कोयला और कबाड़ चोरी के आरोप
सूत्रों के हवाले से खबर हैं कि खदान क्षेत्र में कबाड़ और कोयले की चोरी का खेल जमकर चल रहा है। जो राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
खदान क्षेत्र में एनसीएल सिक्योरिटी और निजी सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। इसके बावजूद यदि चोरी की घटनाएं हो रही हैं, तो यह जानना जरूरी है कि सुरक्षा में चूक कहां हो रही है और इसकी जवाबदेही किसकी है।
कबाड़ और कोयले के मामलों में कुछ कर्मचारियों और संबंधित विभागों की भूमिका संदिग्ध है। जिसका निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जिम्मेदारों की चुप्पी बनी चर्चा,उठ रहे बड़े सवाल
करोड़ों रुपये की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चोरी कैसे हो रही है?
सीसीटीवी और बूम बैरियर की निगरानी कितनी प्रभावी है?सुरक्षा में चूक हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
क्या पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी?
