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SINGRAULI NEWS; पूर्ण मुआवजा नहीं, नौकरी नहीं आखिर कब तक विस्थापितों के हक पर चलेगा बुलडोजर, NCL प्रबंधन के खिलाफ मेढ़ौली में फूटा आक्रोश।

मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर विस्थापितों का बढ़ता गुस्सा, खदान क्षेत्र में लगातार बन रहा तनाव का माहौल।

सिंगरौली। एनसीएल परियोजना के विस्तार के नाम पर वर्ष 2011 में मेढ़ौली क्षेत्र के जिन परिवारों की जमीन और आशियाने अधिग्रहित किए गए थे, उन्हें आज तक पूर्ण मुआवजा और रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विस्थापितों ने नाराजगी जताई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें उनका पूरा अधिकार मिला और न ही रोजगार की वह व्यवस्था, जिसका आश्वासन अधिग्रहण के समय दिया गया था।
विस्थापितों का आरोप है कि परियोजना प्रबंधन एवं आउटसोर्सिंग कार्य कराने वाले ठेकेदारों द्वारा लगातार कार्य कराया जा रहा है, लेकिन स्थानीय प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे क्षेत्र के युवाओं और प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

“जमीन गई, मकान गया, लेकिन नहीं मिला हक”

विस्थापित परिवारों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका के साधन परियोजना में समाहित हो गए, लेकिन बदले में जो सुविधाएं और मुआवजा मिलना चाहिए था, वह आज तक अधूरा है। कई परिवार ऐसे हैं जो वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
प्रभावित लोगों का कहना है कि पूर्ण मुआवजा दिए बिना ही कई मकानों को हटाने और खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे लोगों में असुरक्षा और असंतोष का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है।

रोजगार की मांग पर बढ़ रही तनातनी।

सूत्रों के अनुसार खदान क्षेत्र में कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों और विस्थापितों के बीच रोजगार को लेकर आए दिन विवाद और बहस की स्थिति बन रही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब उनकी जमीन पर परियोजना चल रही है तो रोजगार में पहली प्राथमिकता उन्हें मिलनी चाहिए।
विस्थापितों का आरोप है कि कई बार प्रबंधन और ठेकेदारों के समक्ष अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यही कारण है कि क्षेत्र में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।

विस्थापितों ने दी आंदोलन की चेतावनी।

विस्थापितों का कहना है कि यदि जल्द ही पूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांग पूर्ण नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन।

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  • Fanindra sinha

    दुनिया की आवाज तेजी से बढ़ता न्यूज़ नेटवर्क संपदक फणींद्र सिन्हा

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By Fanindra sinha

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