SINGRAULI NEWS: NCL झींगुरदा परियोजना में कोयले का काला खेल,आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल ?
जीएम, सिक्योरिटी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध।
सिंगरौली। देश की ऊर्जाधानी कहे जाने वाले सिंगरौली जिले की NCL झींगुरदा परियोजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। खदान क्षेत्र में ओबी (ओवर बर्डन) कार्य करने वाली कलिंगा कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड पर खदान के भीतर से कोयला निकालने के गंभीर मामले सामने आए हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र की लापरवाही अथवा मिलीभगत के कारण खदान से कोयला बाहर पहुंच रहा है, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान होने हो रहा है।
दोपहर में कोयला लोड वोल्वो पहुंचा कैंप।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कलिंगा कंपनी का वोल्वो वाहन क्रमांक UP 64 CT 1339 दोपहर के समय झींगुरदा खदान क्षेत्र से बाहर निकलते हुए देखा गया। बताया जा रहा है कि वाहन में नीचे कोयला तथा ऊपर मिट्टी लोड की गई थी, जिससे पहली नजर में वाहन ओबी परिवहन करता हुआ दिखाई दे। वाहन के बैरियर पार कर कैंप क्षेत्र तक पहुंचने की चर्चा पूरे क्षेत्र में बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल – बैरियर पर जांच क्यों नहीं हुई?
यदि खदान क्षेत्र से वोल्वो वाहन लोड बाहर जा रहा था तो सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि खदान के प्रवेश एवं निकास द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने वाहन की जांच क्यों नहीं की? आखिरकार किस आधार पर वाहन को बैरियर पार करने की अनुमति दी गई? क्या सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है?
सिक्योरिटी व्यवस्था पर उठे सवाल।
एनसीएल की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हमेशा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। जगह-जगह बैरियर, सुरक्षा गार्ड, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद यदि कोयला लोड वाहन खदान क्षेत्र से बाहर निकल जाता है तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
जीएम और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध।
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि बिना उच्च स्तर की जानकारी के इस प्रकार का कार्य संभव नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
सरकारी संपत्ति को नुकसान का आरोप।
कोयला देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है। यदि खदान से अवैध रूप से कोयला बाहर ले जाया जा रहा है तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है बल्कि पूरे खनन तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं। क्षेत्र के लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज।
सूत्रों का मानना है कि खदान क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज, बैरियर रजिस्टर, वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड तथा कोयला लोडिंग स्थल की जांच की जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
वाहन क्रमांक UP 64 CT 1339 वोल्वो ओबी ढोने वाला कैसे निकाला खदान से बाहर किस अधिकारी के द्वारा दिया गया था आदेश
बैरियर पर जांच क्यों नहीं हुई?
सुरक्षा कर्मियों ने वाहन को कैसे जाने दिया?
क्या खदान प्रबंधन को इसकी जानकारी थी?
कोयला का रॉयल्टी और रिकॉर्ड कहां है?
क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होगी?
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