SINGRAULI NEWS: मोरवा का कचरा प्लांट बना शोपीस,आखिर किसके संरक्षण में सिटाडेल कंपनी की मनमानी ?
मोरवा/सिंगरौली। नगर निगम सिंगरौली के मोरवा स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट की स्थिति आज सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस प्लांट का उद्देश्य शहर के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना था, लेकिन वर्तमान हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा प्लांट केवल नाम का रह गया है और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हुए हैं।
पहला सवाल – आखिर बंद क्यों पड़ा है कचरा प्लांट?
मोरवा स्थित कचरा प्लांट में रोजाना नगर निगम क्षेत्र से भारी मात्रा में कचरा पहुंचता है, लेकिन आरोप है कि उसका समुचित निस्तारण नहीं किया जा रहा। प्लांट परिसर में कचरे के पहाड़ खड़े हो रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक प्रसंस्करण की व्यवस्था धरातल पर दिखाई नहीं देती।
दूसरा सवाल – सिटाडेल कंपनी पर मेहरबान कौन?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा प्रबंधन का जिम्मा संभाल रही सिटाडेल कंपनी नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रही है। सफाई और कचरा निस्तारण के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान लिया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है।
तीसरा सवाल – जंगलों में फेंका जा रहा कचरा?
सूत्रों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार कई स्थानों पर कचरा प्लांट में प्रसंस्करण करने के बजाय खुले क्षेत्रों और जंगलों में कचरा डंप किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है।
चौथा सवाल – नगर निगम अधिकारी क्यों हैं मौन?
सबसे बड़ा प्रश्न नगर निगम सिंगरौली के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर खड़ा हो रहा है। आखिरकार यदि कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत का खेल चल रहा है?
पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में पड़े कचरे से जहरीली गैसें निकलती हैं, भूजल प्रदूषित होता है और आसपास रहने वाले लोगों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
जनता पूछ रही है जवाब
कचरा प्लांट में कचरे का नियमित निस्तारण क्यों नहीं हो रहा?
सिटाडेल कंपनी के कार्यों का ऑडिट कब होगा?
जंगलों में कचरा फेंकने की शिकायतों की जांच कौन करेगा?
नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब कौन देगा?
मोरवा का कचरा प्लांट आज व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनी पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला पर्यावरणीय और प्रशासनिक घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।
अब देखना यह है कि नगर निगम सिंगरौली जनता के सवालों का जवाब देता है या फिर कचरे के ढेरों के बीच जिम्मेदारियां भी दफन होती रहेंगी।
“कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों का खेल या जनता के साथ छल? जवाब मांग रहा है सिंगरौली!”
