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SINGRAULI NEWS: सिंगरौली पुलिस ने बारात आने से पहले रुकवाया बाल विवाह, 16 वर्षीय किशोरी का भविष्य बचाया गया

“बेटी की डोली नहीं, पहले होगी पढ़ाई” — पुलिस और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त कार्रवाई से टला बाल विवाह

सिंगरौली। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सिंगरौली पुलिस ने एक बार फिर संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए एक नाबालिग किशोरी की जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में महिला थाना पुलिस, खुटार चौकी पुलिस एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ग्राम कंजी में होने जा रहे बाल विवाह को रुकवा दिया।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस अधीक्षक को सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम कंजी निवासी रामअवध पटेल पिता मुण्डू पटेल अपनी लगभग 16 वर्षीय अवयस्क पुत्री का विवाह राहुल पटेल पिता संतोष पटेल निवासी भर्रा, पोस्ट कर्थुआ के साथ 19 जून 2026 को कराने की तैयारी कर रहे हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला थाना प्रभारी आराधना सिंह को तत्काल जांच एवं सत्यापन के निर्देश दिए।

सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस

मामले की जानकारी मिलते ही महिला थाना पुलिस ने जिला महिला एवं बाल विकास विभाग को अवगत कराया। सूचना को गंभीर मानते हुए विभागीय अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की रणनीति तैयार की।

एक दिन पहले गांव पहुंची टीम

दिनांक 18 जून 2026 को सीडीपीओ बिंदू उइके एवं उनकी टीम, खुटार चौकी प्रभारी शीतला यादव के सहयोग से ग्राम कंजी पहुंची। टीम ने परिजनों को बाल विवाह कानून और इसके दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया।
हालांकि विवाह की तैयारियां जारी रहीं, जिसके बाद अगले दिन बड़ी कार्रवाई की गई।

बारात आने की तैयारी के बीच पहुंचा प्रशासन

आज 19 जून 2026 को पुलिस एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम फिर से गांव पहुंची। उस समय विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में थीं और बारात आने की तैयारी चल रही थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री षियाज के.एम., अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सर्वप्रिय सिन्हा, महिला थाना प्रभारी, खुटार चौकी प्रभारी एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को कानून एवं बच्ची के भविष्य के संबंध में समझाइश दी।

अंकसूची से खुली सच्चाई

जांच के दौरान किशोरी की कक्षा 9वीं की अंकसूची प्रस्तुत की गई, जिसमें उसकी जन्मतिथि 16 अगस्त 2012 अंकित पाई गई।
दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट हुआ कि लड़की की उम्र वैधानिक विवाह आयु से काफी कम है और वह पूरी तरह अवयस्क है।

बाल विवाह पर लगी रोक

अवयस्क होने की पुष्टि के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्काल विवाह रुकवाया। किशोरी एवं उसकी माता को आवश्यक संरक्षण एवं आगे की कार्रवाई हेतु बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इस प्रकार प्रशासन की सजगता और त्वरित हस्तक्षेप से एक नाबालिग बालिका का भविष्य अंधकारमय होने से बच गया।

बाल विवाह एक अपराध है

बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह कराना कानूनन अपराध है और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

सिंगरौली पुलिस एवं महिला बाल विकास विभाग ने जिलेवासियों से अपील की है कि—
“अपने बच्चों का विवाह कम उम्र में न करें। उन्हें शिक्षित करें, आत्मनिर्भर बनाएं और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करें। आपका एक सही निर्णय आपके बच्चों का जीवन संवार सकता है।”

बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ

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  • Fanindra sinha

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