SASARAM NEWS: 55 साल पुराने बाराडीह पुल में दरार प्रशासन जागा तब जब खतरे की घंटी बज चुकी थी।
सासाराम-चौसा मुख्य मार्ग पर बड़ा संकट, भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक, शासन की लापरवाही पर उठे सवाल
रोहतास/करगहर। सासाराम-चौसा मुख्य मार्ग पर स्थित बाराडीह पुल के गार्डर में दरार मिलने के बाद पथ निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने एहतियातन भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल रोक लगा दी है। करीब 55 वर्ष पुराने इस पुल की स्थिति सामने आने के बाद क्षेत्रीय लोगों में दहशत का माहौल है और शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
“दरार पुल में या सिस्टम में? 55 साल तक नहीं हुई सुध, अब हादसे का डर सताया तो जागा विभाग!”
पुल के गार्डर में मिली खतरनाक दरार
स्थानीय स्तर पर निरीक्षण के दौरान बाराडीह पुल के मुख्य गर्डर में दरार देखी गई। जानकारी मिलते ही पथ निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच में संरचना को कमजोर पाया गया।
भारी वाहनों के प्रवेश पर तत्काल रोक।
किसी भी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए विभाग ने पुल से ट्रक, हाईवा, बस और अन्य भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
तकनीकी जांच की तैयारी।
पुल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों की टीम द्वारा तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत अथवा अन्य आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
तीन प्रमुख क्षेत्रों की लाइफलाइन है यह पुल
बाराडीह पुल केवल एक पुल नहीं बल्कि करगहर, कोचस और बक्सर को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रतिदिन हजारों लोग और सैकड़ों वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। भारी वाहनों पर रोक लगने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।
55 साल पुराने पुल की समय पर नहीं हुई मॉनिटरिंग?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की हालत वर्षों से खराब हो रही थी लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सवाल उठ रहा है कि यदि नियमित निरीक्षण होता तो स्थिति यहां तक क्यों पहुंचती?
हादसे का इंतजार कर रहा था विभाग?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रदेश में कई बार पुल हादसों के बाद प्रशासन हरकत में आता है। बाराडीह पुल के मामले में भी यदि दरार समय पर नहीं दिखती तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।
जनता पूछ रही है सवाल
55 साल पुराने पुल का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट क्यों नहीं हुआ?
पुल कमजोर होने के संकेत पहले से थे तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
करोड़ों रुपये सड़क और पुलों पर खर्च होने के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन पूरी तरह जागता है?
आवागमन प्रभावित, लोगों की बढ़ी परेशानी
भारी वाहनों पर रोक लगने से व्यापारिक गतिविधियों और माल ढुलाई पर असर पड़ने लगा है। वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
बड़ा सवाल
“अगर दरार पहले नहीं दिखी तो जिम्मेदार कौन? और अगर दिखी थी तो कार्रवाई देर से क्यों हुई?”
बाराडीह पुल में आई दरार ने एक बार फिर प्रदेश के पुराने पुलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब लोगों की निगाहें तकनीकी जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
पुराने पुलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था सुधारी जा सके।
