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SASARAM NEWS: बसडीहा पंचायत बना भ्रष्टाचार का गढ़ 7 लाख की पुलिया बनी लेकिन चढ़ने-उतरने का रास्ता गायब, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत पर उठे सवाल

 

15वें वित्त आयोग की राशि पर डाका ? निर्माण पूरा दिखाकर निकाल ली गई रकम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

करगहर (रोहतास)। रोहतास जिले के करगहर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बसडीहा एक बार फिर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में है। पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित ग्राम धगुआ के हरिजन टोला में लगभग 7 लाख 4 हजार 800 रुपये की लागत से निर्मित पुलिया अब ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर खड़ी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण के नाम पर सरकारी राशि खर्च तो कर दी गई, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। पुलिया पर चढ़ने और उतरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे यह आम लोगों के उपयोग के लायक ही नहीं रह गई है।

योजना का विवरण बोर्ड पर, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और

कार्यस्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड के अनुसार योजना का नाम “बसडीहा पंचायत के ग्राम धगुआ हरिजन टोली में पुलिया निर्माण” है। योजना संख्या 02/24-25 बताई गई है तथा इसकी प्राक्कलित राशि ₹7,04,800 अंकित है।
बोर्ड पर कार्य एजेंसी के रूप में जिला अभियंता, सासाराम (रोहतास) का नाम दर्ज है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बोर्ड लगाकर केवल खानापूर्ति की गई है, जबकि निर्माण कार्य में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं।

पुलिया तो बनी, लेकिन ग्रामीण जाएं तो जाएं कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिया तक पहुंचने के लिए दोनों तरफ न तो मिट्टी भराई कराई गई और न ही संपर्क मार्ग तैयार किया गया, तो आखिर इसका लाभ किसे मिल रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के ऊपर चढ़ने और नीचे उतरने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह संरचना लोगों के किसी काम की नहीं है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य का सही निरीक्षण हुआ होता तो ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती।

अधूरा प्लास्टर, अधूरा काम, फिर भी पूरा भुगतान?

ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया के अंदरूनी हिस्से में तो प्लास्टर कर दिया गया, लेकिन बाहरी हिस्से में प्लास्टर तक नहीं किया गया।
यही नहीं, निर्माण कार्य में गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य अधूरा होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा गई है।

एक से दो वर्ष पहले बना पुल, आज तक नहीं हुआ मिट्टी भराव

ग्रामीणों के अनुसार पुलिया का निर्माण लगभग एक से दो वर्ष पूर्व कराया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी पुलिया के दोनों ओर मिट्टी भराव और ढलाई का कार्य नहीं कराया गया।
ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ था तो संबंधित अधिकारियों ने इसका मापन और भुगतान कैसे कर दिया?

ग्रामीणों का बड़ा आरोप – कमीशनखोरी के चलते विकास कार्यों की गुणवत्ता हुई बर्बाद

मौके पर मौजूद कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में कई निर्माण कार्य केवल कागजों पर पूरे दिखाए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं में गुणवत्ता और जनहित की बजाय कमीशनखोरी हावी है। ग्रामीणों के अनुसार जनता की सुविधा से ज्यादा चिंता फाइलों में कार्य पूर्ण दिखाने और भुगतान कराने की की जा रही है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर संबंधित विभागीय अधिकारियों तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होता और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती तो पुलिया की यह स्थिति नहीं होती।
लोग पूछ रहे हैं कि आखिर अधूरे निर्माण को पूर्ण किस आधार पर घोषित किया गया? भुगतान की स्वीकृति किसने दी? और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही कौन तय करेगा?

जांच की मांग तेज, दोषियों पर कार्रवाई की उठी आवाज

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो निर्माण कार्य में हुई कथित अनियमितताओं और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आ जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल

क्या 7 लाख रुपये की सरकारी राशि से बनी यह पुलिया वास्तव में जनता की सुविधा के लिए बनाई गई थी, या फिर सरकारी धन खर्च दिखाकर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली?
जब पुलिया तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं, मिट्टी भराव नहीं, बाहरी प्लास्टर नहीं, तो फिर निर्माण कार्य को पूर्ण मानकर भुगतान कैसे कर दिया गया?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों के सवालों का जवाब कब मिलता है।

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  • Fanindra sinha

    दुनिया की आवाज तेजी से बढ़ता न्यूज़ नेटवर्क संपदक फणींद्र सिन्हा

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