SINGRAULI NEWS: नौकरी दो या जमीन लौटाओ एनसीएल जयंत परियोजना के खिलाफ विस्थापितों का बिगुल
एनसीएल जयंत परियोजना के खिलाफ विस्थापितों का फूटा गुस्सा
नौकरी के नाम पर खानापूर्ति, जमीन खाली कराने का आरोप, आंदोलन तेज
सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की जयंत परियोजना एक बार फिर विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है। परियोजना प्रभावित और विस्थापित परिवारों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रोजगार, आवास और पुनर्वास की सुविधाएं देने के बजाय उन्हें उनकी जमीनों से जबरन हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
“पहले रोजगार दो, फिर जमीन लो” की मांग पर अड़े विस्थापित
विस्थापित परिवारों का कहना है कि वर्षों पहले उनकी कृषि भूमि और मकान परियोजना विस्तार के लिए अधिग्रहित किए गए थे। उस समय कंपनी और प्रशासन की ओर से रोजगार, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन आज तक बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार इन सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा रोजगार देने के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि वास्तविक पात्र परिवारों को अब तक स्थायी समाधान नहीं मिला है। इसी कारण प्रभावित लोग “पहले रोजगार, फिर अधिग्रहण” की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
जमीन खाली कराने पहुंची टीम पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी मांगों को लेकर जमीन पर बैठे रहते हैं और कंपनी के कार्यों का विरोध करते हैं, तब परियोजना के कर्मचारी एवं ठेका कर्मी उन्हें वहां से हटाने का प्रयास करते हैं। कुछ विस्थापितों का कहना है कि उन्हें धक्का देकर हटाया गया और उनकी बात सुनने के बजाय दबाव बनाया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि कंपनी संवाद के बजाय दबाव की नीति अपना रही है।
काम रोकने पर बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर विस्थापितों ने परियोजना क्षेत्र में चल रहे कार्यों का विरोध करते हुए काम रोकने का प्रयास किया। उनका कहना है कि जब तक रोजगार और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण नहीं होगा, तब तक कंपनी को आगे का विस्तार कार्य नहीं करने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई का डर दिखाकर आंदोलन समाप्त करने का दबाव बनाया जाता है।
पुलिस कार्रवाई की चेतावनी देने का आरोप
विस्थापितों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब वे अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और वे केवल अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रोजगार और पुनर्वास की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वर्षों से लंबित हैं कई मामले
स्थानीय लोगों के अनुसार परियोजना प्रभावित परिवारों के कई आवेदन वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। रोजगार पात्रता, मुआवजा, आवासीय भूखंड और पुनर्वास जैसी समस्याओं का समाधान नहीं होने से लोगों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों की जमीन तो चली गई लेकिन उन्हें आज तक रोजगार नहीं मिला। ऐसे में उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
आंदोलन को मिल रहा समर्थन
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का भी कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है। उनका मानना है कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
क्या कहते हैं विस्थापित?
विस्थापितों का कहना है कि जब तक सभी पात्र परिवारों को रोजगार, आवास और पुनर्वास का लाभ नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है।
प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती
जयंत परियोजना के विस्तार और कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के बीच अब पुनर्वास और रोजगार का मुद्दा बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।
