SINGRAULI NEWS: सिटाडेल और नगर निगम की कथित मिलीभगत से मोरवा की सफाई व्यवस्था बेपटरी, जनता बदबू और गंदगी से त्रस्त
मोरवा, सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मोरवा क्षेत्र में नालियों से निकाला गया कचरा कई-कई दिनों तक सड़कों और कॉलोनियों के किनारे पड़ा रहने से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आरोप है कि सफाई का जिम्मा संभाल रही सिटाडेल कंपनी की लापरवाही और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मेहरबानी के कारण पूरे क्षेत्र की सफाई व्यवस्था चौपट होती जा रही है।
5-5 दिनों तक क्यों पड़ा रहता है नालियों का कचरा?
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि सफाई कर्मियों द्वारा नालियों की सफाई तो कर दी जाती है, लेकिन निकाले गए कचरे का समय पर उठाव नहीं होता। कई स्थानों पर 4 से 5 दिनों तक कचरा सड़कों के किनारे पड़ा रहता है। तेज हवा चलने पर यही कचरा आसपास की कॉलोनियों में फैल जाता है और दुर्गंध से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है।
जनता पूछ रही है कि जब सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो आखिर कचरे के उठाव में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है?
आखिर सिटाडेल कंपनी पर इतनी मेहरबानी क्यों?
नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था की निगरानी और अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है। लेकिन लगातार शिकायतों और जनाक्रोश के बावजूद यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बाद भी सिटाडेल कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि नगर निगम के अधिकारी कंपनी पर सख्ती नहीं दिखा रहे?
जंगलों में क्यों फेंका जा रहा है कचरा?
क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कचरा प्लांट में निस्तारण के बजाय कचरे को जंगलों में फेंका जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब जंगलों में फेंके गए कचरे की खबरें सार्वजनिक हुईं तो मामले को दबाने के लिए एक स्थान से कचरा हटाकर दूसरे घने जंगल क्षेत्र में डाल दिया गया, ताकि लोगों और मीडिया की नजरों से दूर रखा जा सके।
यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
चौथा सवाल: कांटा मोड़ के पास स्थित कचरा प्लांट का क्या हुआ?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि कांटा मोड़ के समीप स्थित कचरा प्लांट आखिर किस स्थिति में है?
यदि प्लांट संचालित है तो वहां नियमित रूप से कचरा क्यों नहीं पहुंच रहा? और यदि प्लांट बंद है तो इसकी आधिकारिक जानकारी जनता को क्यों नहीं दी जा रही? कचरा निस्तारण की पूरी प्रक्रिया पर अब पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है।
जब निस्तारण नहीं हो रहा तो भुगतान क्यों?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो रहा, प्लांट में कचरा नहीं पहुंच रहा और सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है, तो फिर सिटाडेल कंपनी के भुगतान में कटौती क्यों नहीं की जा रही?
नगर निगम के नियमों के अनुसार कार्य में लापरवाही पाए जाने पर आर्थिक दंड और भुगतान कटौती का प्रावधान होता है। ऐसे में जनता जानना चाहती है कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
जिला मुख्यालय के प्लांट में क्यों नहीं भेजा जाता कचरा?
यदि मोरवा का कचरा प्लांट बंद या निष्क्रिय है तो नगर निगम सिंगरौली क्षेत्र से निकलने वाले कचरे को जिला मुख्यालय स्थित कचरा प्रबंधन केंद्र में क्यों नहीं भेजा जाता? आखिर ऐसी कौन सी बाधा है जिसके कारण कचरा सड़कों, नालियों और जंगलों में पहुंच रहा है?
जनता मांग रही जवाब
मोरवा क्षेत्र की जनता अब सीधे तौर पर जवाब मांग रही है। लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़कों पर गंदगी, नालियों के किनारे कचरे के ढेर और जंगलों में कचरा फेंकने जैसी स्थिति बनी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जांच की उठी मांग स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
मोरवा कचरा प्लांट की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
जंगलों में कचरा फेंकने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सफाई कार्य और कचरा निस्तारण का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जनता को नियमित सफाई और कचरा निस्तारण की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मोरवा की सफाई व्यवस्था को बदहाल बनाने का जिम्मेदार कौन है — सिटाडेल कंपनी, नगर निगम के अधिकारी या दोनों की मिलीभगत?
