SINGRAULI NEWS:मोरवा में जल संकट के बीच नाली में बह रहा हजारों लीटर पानी, नगर निगम की लापरवाही पर उठे सवाल
“जल संकट के बीच जल की बर्बादी, जिम्मेदार कौन?”
“मोरवा की जनता त्रस्त, नगर निगम मस्त!”
वार्ड क्रमांक-8 स्थित जल मीनार से प्रतिदिन व्यर्थ बह रहा पानी, कहीं बूंद-बूंद को तरस रहे लोग तो कहीं नालियों में बहाई जा रही अमूल्य जल संपदा।
सिंगरौली नगर पालिका निगम के मोरवा जोन अंतर्गत वार्ड क्रमांक-8 में स्थित जल मीनार से लगातार पानी व्यर्थ बह रहा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जल मीनार से निकलने वाला पानी सीधे नाली में जा रहा है और बड़ी मात्रा में जल बर्बाद हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों का ध्यान नहीं है।
स्थानीय लोगों का आरोप।
स्थानीय निवासियों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। कई बार तो पूरी रात पानी नालियों में बहता रहता है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचता।
लोगों का कहना है कि एक तरफ क्षेत्र के कई मोहल्लों में पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ हजारों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद किया जा रहा है।
जनता परेशान, अधिकारी बेपरवाह।
मोरवा क्षेत्र के लोग पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। कहीं समय पर कचरा नहीं उठ रहा, कहीं दुर्गंध से लोग परेशान हैं, तो कहीं पानी की किल्लत बनी हुई है। इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं के समाधान के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
सफाई व्यवस्था पर भी सवाल।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि खुले स्थानों पर मृत मवेशी फेंके जा रहे हैं, जंगलों में कचरा डंप किया जा रहा है और सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। नगर निगम की कथित उदासीनता के चलते सफाई व्यवस्था को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल।
जल मीनार से प्रतिदिन बह रहे पानी का जिम्मेदार कौन?
क्या नगर निगम के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है?
जब क्षेत्र में पानी की समस्या है तो जल की बर्बादी क्यों?
जनता की शिकायतों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या जिम्मेदार कर्मचारियों पर कोई जवाबदेही तय होगी?
एक तरफ भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए भटक रहे हैं, दूसरी तरफ नगर निगम की लापरवाही से अमूल्य जल नालियों में बहाया जा रहा है। मोरवा की जनता अब पूछ रही है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे? या फिर जनता की समस्याएं सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रहेंगी?
