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SINGRAULI NEWS: कचरे में मौत तलाशती गायें, जंगल बना कचरा यार्ड, नगर निगम और सीटाडेल कंपनी पर उठे गंभीर सवाल

खुले में कचरा फेंक पर्यावरण से खिलवाड़, मृत मवेशियों को भी बनाया कचरे का हिस्सा

मोरवा, सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली के उप-जोन मोरवा क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। शहर और कॉलोनियों से एकत्रित होने वाला कचरा निर्धारित कचरा प्लांट तक पहुंचाने के बजाय कथित रूप से कांटा मोड़ क्षेत्र के जंगलों में खुलेआम फेंका जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि कचरे के विशाल ढेरों के बीच गाय और अन्य मवेशी भोजन की तलाश में भटक रहे हैं। प्लास्टिक, मेडिकल वेस्ट और सड़े-गले कचरे के बीच भोजन खोजते ये बेजुबान जानवर धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि मृत मवेशियों को भी इसी कचरे के ढेर में फेंका जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

कचरा प्लांट बना शोपीस, जंगल में चल रहा कचरा  डंपिंग का खेल ?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर कचरा प्रबंधन के लिए प्लांट बनाया गया है, ताकि वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया जा सके। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। आरोप है कि सीटाडेल कंपनी के वाहन शहर से कचरा उठाकर प्लांट तक ले जाने के बजाय सीधे जंगलों में डंप कर रहे हैं।
यदि यह आरोप सही हैं तो बड़ा सवाल यह है कि जब कचरा प्रबंधन के लिए प्लांट मौजूद है, तब खुले में कचरा फेंकने की अनुमति किसने दी? क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में हो रहा है?

मृत मवेशियों के खुले निस्तारण से बढ़ा खतरा

मृत पशुओं को खुले में फेंकना न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। मृत जानवरों के सड़ने से निकलने वाली दुर्गंध और बैक्टीरिया आसपास के क्षेत्रों में बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि दुर्गंध के कारण उनका घरों में रहना मुश्किल हो गया है।

नगर निगम अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

पूरा मामला सामने आने के बाद नगर निगम सिंगरौली के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिरकार किसके संरक्षण में जंगलों को कचरा घर बनाया जा रहा है? यदि कंपनी नियमों का उल्लंघन कर रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में निगम प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है?

जांच और कार्रवाई की मांग

क्षेत्रीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरण प्रदूषण, जल स्रोतों की खराबी और बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

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  • Fanindra sinha

    दुनिया की आवाज तेजी से बढ़ता न्यूज़ नेटवर्क संपदक फणींद्र सिन्हा

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