SINGRAULI NEWS: रात के अंधेरे में धधक रही कोयला चोरी झींगुरदा कोल यार्ड से रेलवे बोगियों तक सक्रिय ‘चिंदी गैंग’, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल।
कभी जंगल, कभी नर्सरी, तो कभी सड़क किनारे… रातभर चलता है कोयला चोरी का खेल।
सिंगरौली। जिले के एनसीएल क्षेत्र में एक बार फिर कोयला चोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। झींगुरदा कोल यार्ड, रेलवे साइडिंग और रेलवे बोगियों से रात के अंधेरे में पिकअप वाहनों के जरिए कथित रूप से कोयला (चिंदी) चोरी कर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जा रहा है। जो राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा पर गंभीर चिंता का विषय है।
रात होते ही सक्रिय हो जाता है नेटवर्क।
बताया जा रहा है कि देर रात कुछ पिकअप वाहन कथित रूप से कोल यार्ड और रेलवे क्षेत्र के आसपास सक्रिय हो जाते हैं। आरोप है कि इन्हीं वाहनों के माध्यम से कोयले की चिंदी एकत्र कर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाई जाती है।
जगह-जगह बनाए गए अस्थायी ठिकाने।
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार चोरी का कोयला कभी जंगलों में, कभी नर्सरी के पास, तो कभी सड़क किनारे खाली स्थानों पर अस्थायी रूप से डंप किया जाता है, ताकि बाद में उसे आसानी से खपाया जा सके।
कई क्षेत्रों में फैला कथित नेटवर्क।
सूत्रों के अनुसार यह गतिविधियां केवल एक स्थान तक सीमित नहीं हैं। आरोप है कि झींगुरदा, निगाही रेलवे साइडिंग, निगाही के जंगल, गोरबी चौकी क्षेत्र की नर्सरी और डंपिंग एरिया सहित कई स्थानों पर ऐसे गिरोह सक्रिय हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरपीएफ, सुरक्षा कर्मियों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी के बावजूद यदि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, तो आखिर यह कैसे संभव हो रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित और सख्त निगरानी हो तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा पर चिंता।
कोयला देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है। यदि चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
झींगुरदा कोल यार्ड और रेलवे साइडिंग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
रात में चलने वाले पिकअप वाहनों की सघन जांच की जाए।
सीसीटीवी, ड्रोन और संयुक्त सुरक्षा अभियान चलाया जाए।
दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
