SINGRAULI NEWS: कोर्ट के पास 11 केवी लाइन पर गिरी पेड़ की डाली, घंटों गुल रही बिजली
बिजली विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल, बड़ा हादसा टला; आखिर कब होगी खतरनाक पेड़ों की छंटाई?
(दुनिया की हल्ला बोल)
सिंगरौली। जिला मुख्यालय स्थित न्यायालय (कोर्ट) परिसर के पास सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सड़क किनारे खड़े यूकेलिप्टस के एक बड़े पेड़ की भारी डाली अचानक टूटकर सीधे 11 केवी विद्युत लाइन पर गिर गई। घटना के बाद बिजली लाइन क्षतिग्रस्त हो गई और आसपास के कई क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति घंटों तक बाधित रही।
सबसे राहत की बात यह रही कि जिस समय पेड़ की डाली गिरी, उस दौरान नीचे से कोई राहगीर या वाहन नहीं गुजर रहा था। यदि यह डाली किसी व्यक्ति या वाहन पर गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पहले भी मिलते रहे संकेत, फिर भी नहीं चेता प्रशासन
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोर्ट परिसर और शहर के कई हिस्सों में सड़क किनारे लगे पुराने और जर्जर यूकेलिप्टस के पेड़ लंबे समय से खतरा बने हुए हैं। कई बार संबंधित विभागों को इनकी छंटाई कराने की मांग की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। परिणामस्वरूप एक बार फिर लापरवाही सामने आ गई।
घंटों बाधित रही बिजली, लोग हुए परेशान
डाली गिरने के बाद 11 केवी लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे आसपास के मोहल्लों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। भीषण उमस के बीच लोगों को घंटों बिना बिजली के रहना पड़ा। घरेलू कार्य, छोटे व्यापार और कार्यालयी गतिविधियां भी प्रभावित रहीं।
सूचना मिलते ही पहुंची बिजली विभाग की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद विद्युत विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और लाइन से पेड़ की डालियां हटाने का कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद मरम्मत कार्य किया गया और बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए गए। समाचार लिखे जाने तक कर्मचारी मौके पर मरम्मत में जुटे हुए थे।
जिम्मेदारों पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है, तब भी बिजली लाइनों के आसपास खड़े खतरनाक पेड़ों की समय रहते छंटाई क्यों नहीं कराई गई? यदि नियमित निरीक्षण और रखरखाव किया जाता तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
बिजली लाइनों के आसपास खड़े सभी खतरनाक पेड़ों की तत्काल छंटाई कराई जाए।
जिला प्रशासन और बिजली विभाग संयुक्त रूप से सर्वे कर जोखिम वाले स्थानों की सूची तैयार करें।
मानसून के दौरान विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाए।
जब कोर्ट जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में भी बिजली लाइनों की सुरक्षा और पेड़ों की समय पर छंटाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो शहर के अन्य इलाकों की स्थिति कैसी होगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
